नकली नोट

 नकली नोट


एक आदमी नकली नोट छपता था . एक दिन गलती से उसने पंद्रह रूपये की एक नोट छाप दी.. अब पंद्रह रूपये की नोट आती तो हैं नहीं ..  

उसने बहुत सोचा - “शहर में तो सब समझदार लोग होते हैं . अगर ये नोट यहाँ चलाने गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा. हाँ अगर किसी दूर दराज़ के गाँव में गया तो शायद ये चल जाए .. “ 

 

ये सोच कर वो बहुत दूर बसे एक छोटे से गाँव में गया ..  

उसने देखा की लोहार लोहे की धौकनी में काम कर रहा हैं ..    

उसने लोहार से कहा - “अरे भाई ! मेरे एक नोट का छुट्टा करा दो .. “ 

ये कहके उसने पंद्रह रुपये का नोट आगे बढ़ा दिया …  

लोहार ने अपना हाँथ पोंछा और नोट को पकड़ कर देखने लगा … साथ ही साथ उसने नोट छापने वाले को भी एक नज़र देखा .. 

उस आदमी की तो हलक सुख गयी … उसे लगा “लगता है लोहार ने पकड़ लिया …” 

लोहार बोला - “भाई जी ! मेरे पास पंद्रह रूपये शायद ना हो .. मैं चौदह रूपये दे सकता हूँ “ 

नोट छापने वाले ने सोचा - “अरे चलो मेरा क्या जाता है .. चौदह ही सही" 

उसने लोहार से कहा - “अब पंद्रह मिलते तो अच्छा होता .. पर लाईये चौदह ही दें दें ..” 

 

लोहार अन्दर गया और बहार आके उसको पैसे पकड़ा दिए …  

 

उस आदमी ने गिनना चाहा तो देखा - दो सात रूपये के नोट हैं … 

  

बिना कुछ कहे वो वह से चला गया … 

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